Thursday, 28 August 2025

एमपी हाई कोर्ट का आदेश, न्यायालय में केस होने के कारण विभागीय जांच नहीं रोकी जा सकती

एमपी हाई कोर्ट का आदेश, न्यायालय में केस होने के कारण विभागीय जांच नहीं रोकी जा सकती, कर्मचारियों की याचिका ख़ारिज

शिकायतकर्ता ओमप्रकाश चंद्रवंशी की शिकायत पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अप्रैल 2023 में दोनों कर्मचारियों  *अभिषेक पारे और गौरीशंकर मीणा* को रिश्वत लेते हुए को रंगे हाथ पकड़ा था।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एफसीआई के दो कर्मचारियों की याचिका को ख़ारिज कर उन्हें झटका दिया है, कोर्ट ने कहा भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में किसी भी विभागीय जाँच को इस आधार पर नहीं रोका नहीं जा सकता कि मामला कोर्ट में चल रहा है।

फूड कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया के दो कर्मचारियों ने हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर उनके खिलाफ चल रही विभागीय जांच रोकने का अनुरोध किया था, याचिका में कर्मचारियों ने कहा कि विभागीय जांच के कारण कोर्ट केस में उन्हें अपना बचाव करने में उन्हें मुश्किल होगी।

FCI के दो कर्मचारियों ने DE रोकने की की मांग  

बता दें FCI के दो कर्मचारियों अभिषेक पारे और गौरीशंकर मीणा को CBI ने अप्रैल 2023 में एक शिकायत के आधार पर रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा था, सीबीआई ने भ्रष्टाचार के इस मामले में दोनों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की और फिर जून 2023 में अदालत में चालान पेश किया।

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याचिकाकर्ताओं ने दिया ये तर्क 

सीबीआई द्वारा एफआईआर दर्ज होने के बाद एफसीआई ने दोनों कर्मचारियों के खिलाफ आरोप पत्र जारी किये और विभागीय जांच के आदेश दिए, इसी विभागीय जाँच को रुकवाने दोनों कर्मचारी हाई कोर्ट पहुंच गए, उन्होंने तर्क दिया कि विभागीय जाँच और आपराधिक मुकदमा साथ साथ चलने से उन्हें परेशानी हो रही है।

हाई कोर्ट ने ख़ारिज की याचिका 

जस्टिस विवेक जैन की अदलत में हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ताओं संजय अग्रवाल, मुकेश अग्रवाल और उत्कर्ष अग्रवाल ने पक्ष रखते हुए विभागीय जाँच को रोकने का अनुरोध किया लेकिन अदालत ने उनकी अनुरोध को स्वीकार नहीं किया, कोर्ट ने कहा कि भ्रष्टाचार जैसे गंभीर आरोपों में विभागीय जांच को रोका नहीं जा सकता, इतना कहकर अदालत ने याचिका ख़ारिज कर दी।

जबलपुर से संदीप कुमार की रिपोर्ट 

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