नामांकित व्यक्ति (Nominee) को जीपीएफ राशि पाने के लिए उत्तराधिकार प्रमाणपत्र की ज़रूरत नहीं: सुप्रीम कोर्ट 14 Jan 2026
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा है कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी ने अपने General Provident Fund (GPF) खाते में किसी व्यक्ति को वैध रूप से नामांकित (nominee) किया है, तो उस नामांकित व्यक्ति को पूरी राशि पाने के लिए उत्तराधिकार प्रमाणपत्र (Succession Certificate), प्रोबेट या लेटर ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन की आवश्यकता नहीं होगी — भले ही राशि ₹5,000 से अधिक क्यों न हो। जस्टिस मनोज मिश्र और जस्टिस मनमोहन की खंडपीठ ने केंद्र सरकार की याचिका को खारिज करते हुए यह फैसला दिया।
कोर्ट ने क्या कहा? सुप्रीम कोर्ट ने कहा: “जहाँ वैध नामांकन मौजूद है, वहाँ मृत कर्मचारी के भविष्य निधि खाते की राशि सीधे नामांकित व्यक्ति को दी जानी चाहिए।” कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि हर मामले में नामांकित व्यक्ति से उत्तराधिकार प्रमाणपत्र माँगा जाएगा, तो नामांकन की पूरी व्यवस्था ही अर्थहीन हो जाएगी (otiose)। ₹5,000 की सीमा अब अप्रासंगिक Provident Funds Act, 1925 के तहत यदि राशि ₹5,000 से अधिक हो, तो उत्तराधिकार प्रमाणपत्र की आवश्यकता होती है। लेकिन कोर्ट ने कहा कि: वर्ष 1925 में ₹5,000 एक बड़ी राशि थी, लेकिन आज महँगाई के कारण इसका कोई महत्व नहीं रह गया है। इसी वजह से सरकार ने स्वयं General Provident Fund (Central Services) Rules, 1960 के Rule 33(ii) में यह प्रावधान किया कि — नामांकित व्यक्ति को राशि किसी भी रकम तक बिना किसी प्रमाणपत्र के दी जाएगी। नामांकित व्यक्ति मालिक नहीं, ट्रस्टी होता है कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि: नामांकित व्यक्ति (Nominee) राशि का अंतिम मालिक नहीं, बल्कि केवल ट्रस्टी (Trustee) होता है।
यदि कोई अन्य वैध वारिस अदालत में दावा करता है, तो वह अपने हिस्से के लिए मुकदमा कर सकता है। अर्थात — सरकार पैसा nominee को दे देगी, लेकिन वारिस आपस में अपना हक अदालत में तय कर सकते हैं। मामले की पृष्ठभूमि एक सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके GPF खाते की राशि उसके भाई परेश चंद्र मंडल को देनी थी, क्योंकि वह नामांकित व्यक्ति था। कुछ भतीजों ने इस पर आपत्ति जताई। Central Administrative Tribunal और बाद में Calcutta High Court ने आदेश दिया कि: Also Read - Order XXI Rule 102 CPC | मुकदमे के दौरान संपत्ति खरीदने वाले को डिक्री के एग्जीक्यूशन में रुकावट डालने का कोई अधिकार नहीं: सुप्रीम कोर्ट चूँकि भाई वैध nominee है, इसलिए राशि उसे ही दी जाए। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में यह कहते हुए चुनौती दी कि चूँकि रकम ₹5,000 से अधिक है, इसलिए succession certificate जरूरी है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया।
सरकार को निजी विवादों में नहीं पड़ना चाहिए कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि: सरकार को मृत कर्मचारी की संपत्ति को लेकर चलने वाले पारिवारिक विवादों में नहीं उलझना चाहिए। नामांकन होने पर पैसा nominee को देना चाहिए और बाकी विवाद निजी पक्षों पर छोड़ देना चाहिए।
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