गिरफ्तारी एवं वास्तविक हिरासत के बीच कृत्रिम अंतर असंवैधानिक : 24 घंटे की गणना वास्तविक हिरासत से होगी, औपचारिक गिरफ्तारी से नहीं
न्यायालय: भारत का सर्वोच्च न्यायालय
प्रकरण: Sujit Das & Ors. v. Union of India
केस नंबर: SLP (Criminal) Nos. 12451–12453 of 2026
निर्णय दिनांक: 05 नवंबर 2026
निर्णय संदर्भ: 2026 INSC 1195
पीठ: माननीय न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां एवं न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदुरकर
निर्णय लेखक: न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां
1. निर्णय के मुख्य सिद्धांत
- संविधान के अनुच्छेद 22(2) के अंतर्गत मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करने की 24 घंटे की समय-सीमा वास्तविक हिरासत (Actual Detention) से प्रारंभ होगी।
- औपचारिक गिरफ्तारी (Formal Arrest) दर्ज करने का समय 24 घंटे की गणना का प्रारंभिक बिंदु नहीं होगा।
- जिस समय पुलिस किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता पर वास्तविक प्रतिबंध लगाती है, उसी समय से संवैधानिक समय-सीमा प्रारंभ हो जाती है।
- गिरफ्तारी एवं हिरासत के बीच कृत्रिम अंतर स्थापित करके पुलिस संवैधानिक सुरक्षा को निष्प्रभावी नहीं कर सकती।
2. संवैधानिक एवं वैधानिक आधार
- संविधान अनुच्छेद 21 – जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार।
- संविधान अनुच्छेद 22(1) – गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी एवं अधिवक्ता से परामर्श का अधिकार।
- संविधान अनुच्छेद 22(2) – 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करने की अनिवार्यता।
- BNSS धारा 56 – गिरफ्तार व्यक्ति को अनावश्यक विलंब के बिना मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत करना।
- BNSS धारा 58 – 24 घंटे से अधिक निरुद्ध न रखने का प्रावधान।
- BNSS धारा 187 – जांच के दौरान हिरासत एवं रिमांड संबंधी प्रावधान।
- NDPS Act धारा 37 – मादक पदार्थों के वाणिज्यिक मात्रा संबंधी मामलों में जमानत की कठोर शर्तें।
3. निर्णय की पृष्ठभूमि
- मामला NDPS अधिनियम के अंतर्गत चार आरोपियों से संबंधित था।
- आरोपियों को 29 सितंबर 2025 को दोपहर 2:00 बजे तलाशी एवं जब्ती की कार्रवाई के दौरान हिरासत में लिया गया।
- पुलिस ने औपचारिक गिरफ्तारी 30 सितंबर 2025 को सुबह 11:00 बजे दर्शाई।
- वास्तविक हिरासत और औपचारिक गिरफ्तारी के बीच लगभग 21 घंटे का अंतर था।
- मामला 11.03 किलोग्राम याबा टैबलेट की बरामदगी से संबंधित था।
- त्रिपुरा हाईकोर्ट ने NDPS अधिनियम की धारा 37 की जमानत संबंधी शर्तों के आधार पर जमानत देने से इनकार किया था।
- सुप्रीम कोर्ट ने माना कि वास्तविक हिरासत 29 सितंबर 2025 को दोपहर 2:00 बजे से प्रारंभ हुई थी और आरोपियों को उसके 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाना चाहिए था।
- संवैधानिक उल्लंघन पाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों की रिहाई का आदेश दिया।
4. सुप्रीम कोर्ट के सात प्रमुख निष्कर्ष
(1) वास्तविक हिरासत से 24 घंटे की गणना
व्यक्ति की स्वतंत्रता जिस समय वास्तव में प्रतिबंधित होती है, उसी समय से 24 घंटे की अवधि प्रारंभ होगी।
(2) समय-सीमा का उल्लंघन
24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश नहीं किए जाने पर संबंधित व्यक्ति को हिरासत से तत्काल रिहा किया जाना चाहिए।
(3) यात्रा समय ही अपवाद
केवल गिरफ्तारी के स्थान से मजिस्ट्रेट के न्यायालय तक पहुंचने में लगने वाला आवश्यक यात्रा समय ही 24 घंटे की गणना से बाहर रखा जा सकता है।
(4) हाईकोर्ट के पूर्व निर्णयों की स्थिति
ओडिशा हाईकोर्ट के Aryaman Pattanaik, मद्रास हाईकोर्ट के Kannan तथा केरल हाईकोर्ट के Arun K Thomas निर्णयों की व्याख्या को सही कानून नहीं माना गया। केरल हाईकोर्ट के Biswajith Mandal निर्णय के दृष्टिकोण को स्वीकार किया गया।
(5) उचित अवधि की हिरासत
24 घंटे की अधिकतम सीमा के भीतर भी हिरासत की अवधि मामले की परिस्थितियों के अनुसार उचित एवं युक्तिसंगत होनी चाहिए।
(6) मजिस्ट्रेट का अनिवार्य दायित्व
मजिस्ट्रेट वास्तविक हिरासत की तारीख एवं समय अपने अभिलेख में दर्ज करेगा तथा 24 घंटे की संवैधानिक सीमा के पालन की जांच करेगा।
(7) अनुचित हिरासत पर रिमांड से इनकार
24 घंटे के भीतर पेशी होने के बावजूद यदि हिरासत की अवधि परिस्थितियों के अनुसार अनुचित रूप से लंबी है, तो मजिस्ट्रेट रिमांड देने से इनकार कर सकता है।
5. पूर्व न्यायिक निर्णयों पर प्रभाव
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी से पहले की वास्तविक हिरासत को 24 घंटे की गणना से अलग नहीं किया जा सकता।
इससे पुलिस द्वारा तलाशी, जब्ती, पूछताछ अथवा जांच के नाम पर व्यक्ति को हिरासत में रखकर औपचारिक गिरफ्तारी बाद में दर्ज करने की प्रक्रिया पर संवैधानिक नियंत्रण स्थापित हुआ है।
6. आपराधिक मामलों में व्यावहारिक उपयोग
इस निर्णय का उपयोग निम्नलिखित परिस्थितियों में किया जा सकता है:
1. पुलिस द्वारा गिरफ्तारी का समय वास्तविक हिरासत के समय से बाद का दर्शाना।
2. तलाशी एवं जब्ती के दौरान व्यक्ति को लंबे समय तक हिरासत में रखना।
3. पूछताछ के नाम पर थाने अथवा अन्य स्थान पर व्यक्ति की स्वतंत्रता प्रतिबंधित करना।
4. गिरफ्तारी मेमो में वास्तविक हिरासत का समय छिपाना।
5. रिमांड आवेदन में हिरासत की वास्तविक अवधि का उल्लेख नहीं करना।
6. 24 घंटे से अधिक समय तक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश न करना।
7. अवैध हिरासत के विरुद्ध संवैधानिक उपचार की मांग करना।
8. मजिस्ट्रेट के समक्ष पुलिस रिमांड का विरोध करना।
7. अधिवक्ता द्वारा पैरवी में उपयोगी बिंदु
- गिरफ्तारी मेमो की तारीख एवं समय की जांच।
- तलाशी एवं जब्ती पंचनामा का समय।
- केस डायरी में हिरासत एवं पूछताछ का विवरण।
- CCTV फुटेज एवं थाने के प्रवेश-निकास अभिलेख।
- पुलिस वाहन की GPS एवं मूवमेंट जानकारी।
- स्वतंत्र गवाहों के बयान।
- गिरफ्तारी से पूर्व व्यक्ति की वास्तविक स्वतंत्रता पर लगाए गए प्रतिबंध के साक्ष्य।
- मजिस्ट्रेट के समक्ष पहली पेशी का वास्तविक समय।
- रिमांड आवेदन एवं रिमांड आदेश का परीक्षण।
8. निर्णय के प्रमुख पैरा
- पैरा 57 – गिरफ्तारी एवं हिरासत के बीच कृत्रिम अंतर।
- पैरा 58 – अनुच्छेद 22(2) की संवैधानिक व्याख्या।
- पैरा 60 – BNSS धारा 58 के अंतर्गत उचित हिरासत अवधि।
- पैरा 61–64 – न्यायिक निगरानी एवं हिरासत में हिंसा।
- पैरा 65–68 – वर्तमान मामले में संवैधानिक उल्लंघन।
- पैरा 69 – न्यायालय के अंतिम निष्कर्ष एवं निर्देश।
9. चैंबर में स्मरण रखने योग्य मुख्य कानूनी सूत्र
Actual Detention → 24 Hours → Production Before Magistrate
अर्थात् वास्तविक हिरासत का समय ही 24 घंटे की गणना का प्रारंभिक बिंदु है।
- Formal Arrest बाद में दर्ज होने से संवैधानिक समय-सीमा आगे नहीं बढ़ेगी।
- यात्रा समय के अतिरिक्त अन्य अवधि को गणना से बाहर नहीं किया जा सकता।
- मजिस्ट्रेट वास्तविक हिरासत की तारीख एवं समय की जांच करेगा।
- 24 घंटे का उल्लंघन होने पर तत्काल रिहाई का निर्देश लागू होगा।
- 24 घंटे के भीतर पेशी होने पर भी हिरासत की उचित अवधि की न्यायिक जांच आवश्यक है।
10. निष्कर्ष
यह निर्णय व्यक्तिगत स्वतंत्रता, संवैधानिक संरक्षण एवं पुलिस हिरासत पर न्यायिक निगरानी के संबंध में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इसका मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पुलिस किसी व्यक्ति को पहले वास्तविक रूप से हिरासत में लेकर बाद में औपचारिक गिरफ्तारी दर्ज करके संविधान के अनुच्छेद 22(2) में प्रदत्त अधिकार को निष्प्रभावी न कर सके।
संदर्भ: 2026 INSC 1195, निर्णय दिनांक 05.11.2026।
No comments:
Post a Comment