*पोता पोती को भी अनुकंपा नियुक्ति दी जा सकती है सुप्रीम कोर्ट ने HC का फैसला रखा बरकरार*
सुप्रीम कोर्ट के याचिका खारिज करने से हाई कोर्ट का 25 फरवरी 2026 का फैसला बरकरार है जिसमें पोते को अनुकंपा नियुक्ति देने पर विचार करने का आदेश दिया गया था। हाई कोर्ट के आदेश में पोते को निकट संबंधी के रूप में अनुकंपा नियुक्ति दिए जाने के बारे में नियम कानून का विस्तार से जिक्र किया गया है।
इस मामले में रेलवे ने जितेन्द्र वर्मा को दादी की मृत्यु के बाद उनकी जगह अनुकंपा नियुक्ति देने से मना कर दिया था। मामले के मुताबिक जितेन्द्र के दादा की 2002 में मृत्यु हो गई उसके पिता की भी 2006 में मृत्यु हो गई।
जितेन्द्र का पालन पोषण उनकी दादी छमा बाई ने किया जो कि पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल मंडल में हेल्पर-2/खलासी के तौर पर नौकरी करती थीं। 19 जून 2016 को नौकरी के दौरान ही उनकी मृत्यु हो गई।
दादा की जगह पोते को मिली थी नौकरी
जितेन्द्र का नाम 2007 में छमा बाई के सर्विस रिकार्ड में उत्तराधिकारी/नामिनी के रूप में दर्ज हो चुका था। जितेन्द्र ने 30 जनवरी 2018 को सिविल कोर्ट से उत्ताराधिकार प्रमाणपत्र भी हासिल किया। दादी की जगह अनुकंपा नियुक्ति का दावा किया।
हालांकि रेलवे ने उत्तराधिकार प्रमाणपत्र को सेवानिवृत्ति संबंधी बकाया के भुगतान तक सीमित मानते हुए नियुक्ति के लिए स्वीकार नहीं किया। हालांकि इसमें विवाद नहीं था कि जितेन्द्र परिवार का अकेला जीवित सदस्य था।
जितेन्द्र ने अनुकंपा नियुक्ति के दावे में कहा था कि वह छमा बाई का गोद लिया हुआ बेटा है। लेकिन रेलवे ने गोद लेने की वैधता पर सवाल उठाया और बाद में उसका दावा खारिज कर दिया।
अनुकंपा नियुक्ति नीति की शर्ते क्या हैं?
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि रेलवे की अनुकंपा नियुक्ति नीति के क्लॉज-तीन में केवल पुत्र, पुत्री, विधवा या विधुर ही नहीं, बल्कि निर्धारित शर्तों के तहत 'निकट संबंधी' तथा वैध रूप से गोद लिए गए पुत्र-पुत्री को भी नियुक्ति का लाभ देने का प्रविधान है। कहा कि जितेंद्र को दत्तक पुत्र न मानने की स्थिति में भी वह मृत कर्मचारी का पोता होने के कारण निकट संबंधी की श्रेणी में आता है।
हाईकोर्ट ने रेलवे द्वारा बार-बार दावा खारिज किए जाने पर भी आपत्ति जताई और कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य ही समय पर राहत देना है। 30 दिन में अनुकंपा नियुक्ति देने तथा 10 हजार रुपये मुकदमा खर्च देने का निर्देश दिया था। रेलवे ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
-------
कोर्ट ने SLP में हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार किया है। इसलिए इसका अनुपात (ratio) तथ्य-विशिष्ट है।
1. मुख्य सुप्रीम कोर्ट केस
Case: Union of India & Ors. v. Jitendra Verma
Court: Supreme Court of India
SLP: SLP (C) Diary No. 52008/2026
निर्णय दिनांक: 28 सितम्बर 2026
Bench: Hon'ble Mr. Justice Manoj Misra एवं Hon'ble Mr. Justice Vijay Bishnoi.
सुप्रीम कोर्ट का मुख्य आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने Article 136 के अंतर्गत हाईकोर्ट के निर्णय में हस्तक्षेप करने का कोई पर्याप्त आधार नहीं पाया और Special Leave Petition dismiss कर दी।
महत्वपूर्ण कानूनी बात: यह आदेश बहुत संक्षिप्त/non-speaking dismissal है। अतः इसे ऐसा निर्णय नहीं माना जाना चाहिए जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने स्वतंत्र रूप से यह घोषित कर दिया हो कि “पोता होना मात्र अनुकंपा नियुक्ति के लिए पर्याप्त है।” बल्कि हाईकोर्ट का आदेश इस मामले में कायम रहा।
2. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का मुख्य Citation
Union of India & Others v. Jitendra Verma
Court: Madhya Pradesh High Court, Jabalpur
Case No.: Misc. Petition No. 4473 of 2025
Neutral Citation: 2026:MPHC-JBP:16281
Decision Date: 25 February 2026
Coram: Justice Vivek Rusia एवं Justice Pradeep Mittal.
हाईकोर्ट का मुख्य प्रतिपादित सिद्धांत
“Near Relative” की श्रेणी में उपयुक्त परिस्थितियों में पोता भी आ सकता है, विशेषकर जब:
1. मृत कर्मचारी ने उसे अपने परिवार/Service Record में दर्ज किया हो।
2. वह वास्तव में मृत कर्मचारी पर निर्भर रहा हो।
3. उसके माता-पिता उपलब्ध न हों।
4. वह परिवार का एकमात्र जीवित/निकट संबंधी हो।
5. लागू Railway Compassionate Appointment Policy में “near relative” को नियुक्ति का लाभ देने का प्रावधान हो।
6. केवल यह कहकर दावा खारिज नहीं किया जा सकता कि वह “पोता” है।
3. इस मामले में Railway Master Circular No.16 का महत्व
हाईकोर्ट ने Master Circular No.16, Clause III को निर्णायक माना।
इसमें सामान्यतः ये व्यक्ति पात्र हैं:
पुत्र
पुत्री
विधवा
विधुर
लेकिन इसके अतिरिक्त नीति में यह भी प्रावधान है कि:
> “near relative/adopted son/daughter”
को भी निर्धारित शर्तों के अधीन अनुकंपा नियुक्ति दी जा सकती है।
“Near Relative” के संबंध में महत्वपूर्ण सिद्धांत
हाईकोर्ट ने माना कि यदि व्यक्ति वैध दत्तक पुत्र सिद्ध नहीं भी होता, तो इसका अर्थ यह नहीं कि उसका दावा स्वतः समाप्त हो जाएगा।
यदि वह मृत कर्मचारी का एकमात्र निकट संबंधी और उस पर आश्रित व्यक्ति है, तो उसकी पात्रता को “near relative” के रूप में जांचना आवश्यक है।
4. Jitendra Verma मामले के विशेष तथ्य
यह हिस्सा भविष्य के मामलों में बहुत महत्वपूर्ण है।
तथ्य स्थिति
दादा की मृत्यु 18.08.2002
पिता की मृत्यु 12.08.2006
दादी Chhama Bai
दादी की नौकरी Helper-II/Khalsi, West Central Railway, Bhopal Division
दादी की मृत्यु 19.06.2016
जितेन्द्र का Service Record में नाम 12.03.2007
स्थिति Legal heir/Nominee
Succession Certificate 30.01.2018
परिवार में स्थिति एकमात्र जीवित सदस्य
दावा दत्तक पुत्र/निकट संबंधी
Railway का विरोध पोते को अनुकंपा नियुक्ति का प्रावधान नहीं
हाईकोर्ट का आदेश नियुक्ति देने का निर्देश
समय 30 दिन
Costs ₹10,000
इन तथ्यों को हाईकोर्ट ने विशेष रूप से ध्यान में रखा।
5. इससे निकलने वाला मुख्य कानूनी सिद्धांत
Principle No. 1
पोता/पोती होना अपने-आप में अनुकंपा नियुक्ति का पूर्ण अधिकार नहीं देता।
लेकिन यदि लागू सेवा नियम/नीति में “near relative” का प्रावधान है और पोता/पोती उस श्रेणी की निर्धारित शर्तों को पूरा करता है, तो उसके दावे पर विचार किया जा सकता है।
Principle No. 2
Dependency अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस मामले में जितेन्द्र का पालन-पोषण दादी ने किया था और वह उन पर निर्भर था। CAT ने भी माना कि उपलब्ध दस्तावेज उसकी dependency सिद्ध करते हैं।
Principle No. 3
यदि मृत कर्मचारी ने अपने Service Record में पोते/पोती को family member/legal heir/nominee के रूप में दर्ज कराया हो, तो यह महत्वपूर्ण supporting circumstance है।
Principle No. 4
यदि माता-पिता पहले ही मर चुके हों और claimant ही परिवार का एकमात्र surviving near relative हो, तो उसका मामला और मजबूत हो जाता है।
Principle No. 5
Succession Certificate और Compassionate Appointment दो अलग-अलग विषय हैं।
Succession Certificate मुख्यतः estate/dues प्राप्त करने के लिए हो सकता है। उससे अपने-आप अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार पैदा नहीं होता। लेकिन इस मामले में succession certificate सहित अन्य परिस्थितियाँ claimant के legal-heir status के समर्थन में महत्वपूर्ण थीं।
Principle No. 6
दत्तक पुत्र होने का दावा असफल होने पर भी दावा पूरी तरह समाप्त नहीं होता, यदि संबंधित व्यक्ति “near relative” के रूप में पात्रता रखता हो।
Principle No. 7
अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य परिवार को तत्काल आर्थिक संकट से राहत देना है। इसलिए सक्षम प्राधिकारी को बार-बार तकनीकी आधार पर claim reject करके व्यक्ति को वर्षों तक litigation में नहीं धकेलना चाहिए।
हाईकोर्ट ने इसी कारण Railway के बार-बार rejection को गंभीरता से लिया और 30 दिन में नियुक्ति देने का निर्देश दिया।
6. एक बहुत महत्वपूर्ण सावधानी — इसे “Universal Precedent” न मानें
यह सबसे महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु है।
सुप्रीम कोर्ट का 28.09.2026 का आदेश SLP dismissal है। उसने हाईकोर्ट के निर्णय में हस्तक्षेप नहीं किया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने विस्तृत reasoning देकर यह नहीं कहा कि:
> “हर deceased employee के grandson/granddaughter को compassionate appointment मिलेगी।”
इसलिए किसी अन्य मामले में केवल इस citation के आधार पर यह कहना कि “पोता होने के कारण नियुक्ति का वैधानिक अधिकार है”, सही नहीं होगा।
बल्कि सही proposition होगा:
> “Where the governing compassionate appointment scheme extends the benefit to a ‘near relative’, a grandson/granddaughter may be considered within that category depending upon the facts, particularly dependency, absence of nearer eligible family members and the claimant's status as the surviving near relative.”
7. पहले के महत्वपूर्ण निर्णय जिन पर इस मामले में reliance लिया गया
Jitendra Verma के CAT आदेश में निम्न निर्णयों का उल्लेख हुआ है:
(1) Kishan v. Union of India & Another
2016 SCC OnLine CAT 4433
मुद्दा: Dependent Relative / compassionate appointment
उपयोग: “near/dependent relative” की अवधारणा के समर्थन में।
(2) Rajvansh v. Union of India & Others
OA No. 638 of 2020
15.07.2023
Allahabad Bench, CAT
मुद्दा: Grandson और compassionate appointment।
(3) Madhya Pradesh High Court – WP No. 5656/2021
04.01.2024
CAT के आदेश में इस निर्णय का उल्लेख है।
इसमें भी grandson के compassionate appointment claim के संदर्भ में सहायता ली गई।
(4) Yashvant v. Union of India & Others
OA No. 203/929/2014
28.11.2017
Grandson को land acquisition employment के संदर्भ में eligible माना गया।
बाद में Chhattisgarh High Court, WP(S) No.1349/2018, decided 03.04.2018 ने उस आदेश को uphold किया।
8. सबसे उपयोगी Citation कैसे लिखें
यदि आपको किसी आवेदन/रिट/अपील/लिखित बहस में इसे cite करना हो तो मैं इसे इस प्रकार लिखने की सलाह दूंगा:
> Union of India & Ors. v. Jitendra Verma, M.P. High Court, Jabalpur, Misc. Petition No.4473/2025, decided on 25.02.2026, Neutral Citation No. 2026:MPHC-JBP:16281.
और उसके बाद:
> SLP (C) Diary No.52008/2026, Union of India & Ors. v. Jitendra Verma, Supreme Court of India, order dated 28.09.2026.
कानूनी proposition: जहाँ लागू compassionate appointment scheme में “near relative” को नियुक्ति की अनुमति है, वहाँ केवल इस आधार पर कि claimant पोता/पोती है, claim को स्वतः अस्वीकार नहीं किया जा सकता; उसकी dependency, surviving family status तथा scheme की शर्तों के अनुसार पात्रता का परीक्षण आवश्यक है।