Saturday, 12 September 2026

पति स्वस्थ, सक्षम एवं कार्य करने योग्य होने के बावजूद पत्नी एवं नाबालिग बच्चे के भरण-पोषण से केवल इस आधार पर बच नहीं सकता कि वर्तमान में उसकी कोई आय नहीं है अथवा वह बेरोजगार है।

 

आवेदिका की ओर से लिखित तर्क


विषय : पति स्वस्थ, सक्षम एवं कार्य करने योग्य होने के बावजूद पत्नी एवं नाबालिग बच्चे के भरण-पोषण से केवल इस आधार पर बच नहीं सकता कि वर्तमान में उसकी कोई आय नहीं है अथवा वह बेरोजगार है।

1. विधिक स्थिति

यह स्थापित विधि है कि भरण-पोषण का प्रावधान सामाजिक न्याय का उपाय है। इसका उद्देश्य पत्नी एवं बच्चों को आर्थिक असहायता, अभाव, वंचना तथा भटकाव से बचाना है। वर्तमान में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 144 के अंतर्गत यह अधिकार प्रवर्तनीय है। पूर्व में यही क्षेत्र दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 125 के अंतर्गत आता था।

केवल यह तथ्य कि पति की वर्तमान आय शून्य बताई गई है, अपने-आप में उसे पत्नी एवं बच्चे के भरण-पोषण के दायित्व से मुक्त नहीं करता। न्यायालय पति की शारीरिक क्षमता, शैक्षणिक योग्यता, कार्य करने की क्षमता, पूर्व रोजगार, पूर्व आय, संपत्ति, जीवन-स्तर तथा वास्तविक earning capacity को देख सकता है।

A. माननीय सर्वोच्च न्यायालय के न्याय-दृष्टांत

1. Bhuwan Mohan Singh v. Meena & Ors.

Criminal Appeal No. 1331 of 2014

निर्णय दिनांक : 15.07.2014

Citation : (2015) 6 SCC 353; AIR 2014 SC 2875

माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि धारा 125 CrPC का प्रमुख उद्देश्य सामाजिक न्याय प्रदान करना तथा पत्नी एवं बच्चों को destitution और vagrancy से बचाना है। न्यायालय ने यह भी प्रतिपादित किया कि सक्षम पति पत्नी के भरण-पोषण के दायित्व से इस प्रकार बच नहीं सकता कि उसके पास वर्तमान में पर्याप्त आय नहीं है। सक्षम एवं स्वस्थ व्यक्ति को आवश्यकता होने पर शारीरिक श्रम करके भी धन अर्जित करना होगा। न्यायालय ने धारा 125 को केवल तकनीकी प्रावधान न मानकर सामाजिक न्याय का प्रभावी साधन माना। उक्त निर्णय में पूर्ववर्ती निर्णयों, विशेषतः Chaturbhuj v. Sita Bai, को भी स्वीकार किया गया।

प्रस्तुत प्रकरण में अनुप्रयोग :

यदि अनावेदक स्वस्थ है, किसी शारीरिक अथवा मानसिक अक्षमता से ग्रस्त नहीं है और कार्य करने में सक्षम है, तो केवल बेरोजगारी का कथन करके वह पत्नी एवं बच्चे के भरण-पोषण के दायित्व से मुक्त नहीं हो सकता।

2. Shamima Farooqui v. Shahid Khan

Criminal Appeal Nos. 564-565 of 2015

निर्णय दिनांक : 06.04.2015

Citation : (2015) 5 SCC 705; (2015) 3 SCC (Civ) 274; (2015) 2 SCC (Cri) 785

माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने पत्नी के भरण-पोषण के संबंध में पति के दायित्व को अत्यंत स्पष्ट किया। न्यायालय ने माना कि भरण-पोषण की राशि ऐसी होनी चाहिए जिससे पत्नी सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर सके। केवल पति की आर्थिक कठिनाई अथवा सेवानिवृत्ति आदि का आधार लेकर भरण-पोषण की राशि को अनुचित रूप से कम नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने यह भी रेखांकित किया कि पत्नी के वास्तविक जीवन-यापन के खर्च को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

प्रस्तुत प्रकरण में अनुप्रयोग :

अनावेदक यदि यह कहता है कि वह वर्तमान में कोई आय अर्जित नहीं कर रहा है, तो उसे अपनी वास्तविक आर्थिक स्थिति, कार्य करने की क्षमता तथा आय अर्जित करने में असमर्थता का विश्वसनीय प्रमाण देना होगा। मात्र मौखिक कथन पर्याप्त नहीं है।

3. Reema Salkan v. Sumer Singh Salkan

Civil/Criminal Maintenance Proceedings; Supreme Court

निर्णय वर्ष : 2019

Citation : (2019) 12 SCC 312

इस मामले में पति ने स्वयं को बेरोजगार बताया था। वह उच्च शिक्षित तथा able-bodied व्यक्ति था। सर्वोच्च न्यायालय ने उसके बेरोजगारी के दावे को परिस्थितियों के संदर्भ में देखा। न्यायालय ने पाया कि पति उच्च शिक्षित था, पूर्व में पर्याप्त आय अर्जित करता था और उसके द्वारा बेरोजगार होने का दावा पर्याप्त प्रमाण से समर्थित नहीं था। न्यायालय ने यह सिद्धांत स्वीकार किया कि शिक्षित एवं सक्षम पति केवल बेरोजगारी का दावा करके अपनी पत्नी के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से बाहर नहीं हो सकता। इस प्रकरण में उच्च न्यायालय द्वारा पति की earning capacity के आधार पर notional income का विचार किया गया था; सर्वोच्च न्यायालय ने quantum निर्धारित करते समय पति के पूर्व जीवन-स्तर, पूर्व आय, योग्यता और परिस्थितियों को भी महत्वपूर्ण माना।

प्रस्तुत प्रकरण में अनुप्रयोग :

यदि अनावेदक स्वस्थ एवं कार्य करने योग्य है, तो उसकी वर्तमान आय शून्य बताने मात्र से उसकी earning capacity समाप्त नहीं हो जाती।

4. Rajnesh v. Neha & Anr.

Criminal Appeal No. 730 of 2020

निर्णय दिनांक : 04.11.2020

Citation : (2021) 2 SCC 324

यह भरण-पोषण के विषय में वर्तमान समय का अत्यंत महत्वपूर्ण एवं व्यापक निर्णय है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने maintenance proceedings के लिए विस्तृत guidelines निर्धारित कीं। न्यायालय ने income disclosure affidavit, maintenance determination के factors, विभिन्न कार्यवाहियों में overlapping maintenance तथा बच्चों की शिक्षा एवं आवश्यकताओं सहित अनेक पहलुओं को व्यवस्थित किया। न्यायालय ने यह सिद्धांत स्वीकार किया कि able-bodied husband को पत्नी एवं बच्चों के भरण-पोषण के लिए पर्याप्त आय अर्जित करने में सक्षम माना जा सकता है और वह अपनी कमाने की क्षमता को जानबूझकर निष्क्रिय करके maintenance liability से बच नहीं सकता।

प्रस्तुत प्रकरण में अनुप्रयोग :

अनावेदक की वास्तविक आय स्पष्ट न होने पर न्यायालय उसकी qualification, occupation, previous employment, assets, lifestyle तथा earning capacity को ध्यान में रखकर उचित maintenance निर्धारित कर सकता है।

5. Anju Garg & Anr. v. Deepak Kumar Garg

Civil Appeal/Criminal proceedings concerning maintenance

निर्णय दिनांक : 28.09.2022

Citation : 2022 SCC OnLine SC 1314

माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अत्यंत स्पष्ट शब्दों में कहा कि पति का पत्नी एवं नाबालिग बच्चों को आर्थिक सहायता प्रदान करना उसका sacrosanct duty है। यदि पति able-bodied है तो उसे आवश्यकता पड़ने पर physical labour से भी धन अर्जित करना होगा और वह केवल यह कहकर अपने दायित्व से नहीं बच सकता कि उसके पास पर्याप्त आय नहीं है। न्यायालय ने Chaturbhuj v. Sita Bai तथा Bhuwan Mohan Singh v. Meena के सिद्धांतों को लागू किया और माना कि Section 125 CrPC सामाजिक न्याय का प्रावधान है।

प्रस्तुत प्रकरण में अनुप्रयोग :

यदि अनावेदक स्वस्थ व्यक्ति है और कोई प्रमाणित अक्षमता नहीं है, तो उसका यह कहना कि “मैं कुछ नहीं कमाता” उसके maintenance obligation का बचाव नहीं हो सकता।

B. माननीय उच्च न्यायालय के न्याय-दृष्टांत

6. Sandeep Kumrawat v. Smt. Antima Kumrawat

High Court of Madhya Pradesh, Bench at Indore

Criminal Revision No. 825 of 2020

निर्णय दिनांक : 19.10.2023

Presiding Judge : Hon'ble Shri Justice Prem Narayan Singh

इस महत्वपूर्ण निर्णय में पति ने स्वयं को बेरोजगार बताया और maintenance कम करने का आग्रह किया। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने उसके तर्क को स्वीकार नहीं किया। न्यायालय ने कहा कि यदि पति कमाने में सक्षम है तो केवल नौकरी छोड़ देने अथवा बेरोजगार होने के आधार पर वह पत्नी एवं बच्चे के भरण-पोषण के दायित्व से मुक्त नहीं हो सकता। न्यायालय ने Shamima Farooqui, Rajnesh v. Neha तथा अन्य सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों के सिद्धांतों को लागू किया। विशेष रूप से न्यायालय ने यह स्वीकार किया कि पति यदि B.Tech/Diploma Engineer जैसे योग्य व्यक्ति होने के बावजूद नौकरी छोड़ देता है, तो केवल नौकरी छोड़ देना maintenance liability से बचने का आधार नहीं बन सकता।

प्रस्तुत प्रकरण में अनुप्रयोग :

यदि वर्तमान अनावेदक स्वयं स्वस्थ एवं सक्षम है और उसने अपनी इच्छा से रोजगार नहीं किया है अथवा रोजगार छोड़ दिया है, तो यह उसकी अपनी पसंद है और इसका आर्थिक भार पत्नी एवं बच्चे पर नहीं डाला जा सकता।

7. Kamal v. State of U.P.

Allahabad High Court

Criminal Revision No. 461 of 2023

निर्णय दिनांक : 25.01.2024

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने Anju Garg v. Deepak Kumar Garg के सिद्धांत को लागू करते हुए माना कि स्वस्थ एवं सक्षम पति यदि यह कहे कि उसके पास नौकरी अथवा अन्य स्रोत से कोई आय नहीं है, तब भी वह पत्नी के भरण-पोषण के दायित्व से मुक्त नहीं होता। न्यायालय ने यह भी माना कि यदि पति शारीरिक श्रम भी करे तो वह न्यूनतम मजदूरी अर्जित कर सकता है; अतः पूर्णतः स्वस्थ व्यक्ति द्वारा “मेरी कोई आय नहीं है” का कथन अपने-आप में पर्याप्त बचाव नहीं है।

प्रस्तुत प्रकरण में अनुप्रयोग :

अनावेदक को अपनी पत्नी एवं बच्चे के भरण-पोषण के लिए वैध साधनों से आय अर्जित करने का प्रयास करना होगा। बेरोजगारी को पत्नी एवं बच्चे के विरुद्ध हथियार नहीं बनाया जा सकता।

8. Naresh v. Seema

Delhi High Court

Criminal Revision Petition No. 195 of 2024

निर्णय वर्ष : 2024

दिल्ली उच्च न्यायालय ने Anju Garg, Rajnesh, Bhuwan Mohan Singh और Shamima Farooqui के सिद्धांतों को लागू करते हुए कहा कि able-bodied husband अपनी पत्नी और नाबालिग बच्चे के भरण-पोषण के लिए legitimate means से आय अर्जित करने के लिए बाध्य है। पति द्वारा यह कहना कि उसका व्यवसाय बंद हो गया है अथवा वर्तमान में आय का कोई स्रोत नहीं है, अपने-आप में maintenance liability समाप्त नहीं करता।

प्रस्तुत प्रकरण में अनुप्रयोग :

अनावेदक स्वस्थ है तो उसकी earning capacity को ध्यान में रखा जाना चाहिए और पत्नी तथा नाबालिग बच्चे को केवल इसलिए अभाव में नहीं छोड़ा जा सकता कि पति वर्तमान में आय अर्जित नहीं कर रहा है।

3. समेकित विधिक सिद्धांत

उपरोक्त सभी न्याय-दृष्टांतों से निम्न विधिक सिद्धांत पूर्णतः स्थापित होते हैं—

(i) पत्नी एवं नाबालिग बच्चे का भरण-पोषण करना पति/पिता का वैधानिक दायित्व है।

(ii) पति का स्वस्थ एवं able-bodied होना अत्यंत महत्वपूर्ण परिस्थिति है।

(iii) केवल “मैं बेरोजगार हूँ” अथवा “मेरी कोई आय नहीं है” कहना maintenance से बचने का वैध आधार नहीं है।

(iv) पति को अपनी पत्नी एवं बच्चों के भरण-पोषण हेतु वैध साधनों से आय अर्जित करने का प्रयास करना होगा।

(v) आवश्यकता होने पर सक्षम पति को physical labour से भी आय अर्जित करनी पड़ सकती है।

(vi) maintenance निर्धारित करते समय केवल disclosed income नहीं बल्कि पति की earning capacity, qualification, past employment, previous income, assets, lifestyle एवं सामाजिक-आर्थिक स्थिति भी देखी जा सकती है।

(vii) पत्नी की आय होने मात्र से भी उसका maintenance claim स्वतः समाप्त नहीं होता; यह देखा जाना आवश्यक है कि वह वास्तव में स्वयं को किस सीमा तक maintain कर सकती है।

(viii) नाबालिग बच्चे का maintenance स्वतंत्र अधिकार है और बच्चे की food, clothing, residence, medical तथा educational requirements पर विशेष रूप से विचार किया जाना आवश्यक है।

4. वर्तमान मामले में निष्कर्ष

अतः यदि वर्तमान प्रकरण में यह तथ्य अभिलेख पर है कि—

1. अनावेदक पति स्वस्थ है;

2. वह किसी ऐसी बीमारी अथवा शारीरिक/मानसिक अक्षमता से ग्रस्त नहीं है जिससे वह कार्य न कर सके;

3. वह कार्य करने योग्य आयु एवं क्षमता में है;

4. उसके पास पर्याप्त शैक्षणिक/व्यावसायिक योग्यता अथवा पूर्व कार्य का अनुभव है;

5. वह अपनी पत्नी एवं नाबालिग बच्चे का भरण-पोषण नहीं कर रहा है; और

6. उसने अपनी वास्तविक आय अथवा assets का पूर्ण एवं सत्य disclosure नहीं किया है,

तो केवल यह कथन कि “मैं कुछ नहीं कमाता” उसे maintenance liability से मुक्त नहीं करता।

माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा Bhuwan Mohan Singh, Shamima Farooqui, Reema Salkan, Rajnesh v. Neha तथा Anju Garg में प्रतिपादित सिद्धांतों के आलोक में अनावेदक की earning capacity को उसकी वर्तमान घोषित आय से अलग करके देखा जाना आवश्यक है।

अतः माननीय न्यायालय से विनम्र निवेदन है कि अनावेदक के केवल बेरोजगार होने के कथन को स्वीकार न करते हुए उसकी वास्तविक आर्थिक क्षमता, योग्यता, पूर्व रोजगार/आय, संपत्ति, रहन-सहन तथा अन्य परिस्थितियों का समुचित मूल्यांकन किया जाए और आवेदिका पत्नी एवं नाबालिग बच्चे के लिए उचित, न्यायसंगत एवं सम्मानजनक भरण-पोषण राशि निर्धारित की जाए।

प्रार्थना

अतः माननीय न्यायालय से प्रार्थना है कि आवेदिका पत्नी एवं नाबालिग बच्चे के भरण-पोषण हेतु परिस्थितियों एवं अनावेदक की वास्तविक earning capacity को दृष्टिगत रखते हुए उचित राशि प्रदान करने की कृपा की जाए तथा अनावेदक को केवल बेरोजगारी अथवा आय न होने के कथन के आधार पर उसके वैधानिक दायित्व से मुक्त न किया जाए।

दिनांक : ____________

स्थान : ____________

आवेदिका/आवेदक की ओर से

अधिवक्ता

इसी संबंध में हिमाचल पदेश हाई कोर्ट का एक जजमेंट सितंबर 2026 में भी आया है

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