Allahabad Highcourt: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भूमि अधिग्रहण से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि रेफरेंस कोर्ट (संदर्भ न्यायालय) को कलेक्टर के अवॉर्ड को निरस्त कर मामले को दोबारा कलेक्टर के पास भेजने (रिमांड) का अधिकार नहीं है। न्यायमूर्ति संदीप जैन ने यह टिप्पणी करते हुए राज्य सरकार की अपील को स्वीकार कर लिया। यह मामला सिद्धार्थनगर जिले के इटवा तहसील स्थित ग्राम तेनुआ ग्रांट में मैनाराजवाहा के निर्माण के लिए अधिग्रहित भूमि से जुड़ा है। वर्ष 2010 में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुई थी और कलेक्टर ने 13 नवंबर 2019 को लगभग 1.14 करोड़ रुपये का मुआवजा निर्धारित किया था।
केस का सही स्वरूप (Reconstructed Case Info)
न्यायालय: इलाहाबाद उच्च न्यायालय
न्यायाधीश: न्यायमूर्ति संदीप जैन (संभवतः, पर यहां पुष्टि आवश्यक है)
विषय: Land Acquisition Reference – Remand Power
स्थान: ग्राम तेनुआ ग्रांट, तहसील इटवा, जिला सिद्धार्थनगर (UP)
मुख्य प्रश्न: क्या Reference Court मामला वापस Collector को भेज सकता है?
⚖️ प्रतिपादित सिद्धांत (Correct Legal Principles)
Reference Court = Civil Court Powers (Limited Scope):
यह केवल मुआवजा तय करने के लिए है, न कि प्रशासनिक कार्य (remand) करने के लिए।
Remand Power नहीं है: Reference Court कलेक्टर के अवॉर्ड को रद्द कर वापस नहीं भेज सकता।
Duty to Decide: कोर्ट को खुद साक्ष्य लेकर अंतिम मुआवजा तय करना ही होगा।
Award is only an Offer: कलेक्टर का अवॉर्ड अंतिम नहीं, बल्कि प्रारंभिक प्रस्ताव होता है।
Avoid Delay: Remand से अनावश्यक विलंब होता है, जो न्याय के विपरीत है।
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